अयोध्या में विवादित स्थल की जगह पर मस्जिद के अस्तित्व में आने से काफी पहले मंदिर होने के नतीजे तक पहुंचने में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के निष्कर्र्षो पर भरोसा जताया है। रिपोर्ट में संबंधित स्थल पर ढाई हजार साल पहले से कोई न कोई ढांचा मौजूद रहने के संकेतों की बात कही गई है।
बोर्ड ने किया था रिपोर्ट का विरोध :
कोर्ट के आदेश पर तैयार एएसआई की रिपोर्ट का सुनवाई के दौरान परीक्षण किया गया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने इसे पक्षपातपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एएसआई ने तथ्यों की गलत व्याख्या की है। बोर्ड के पास इसके खिलाफ अकाट्य ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य हैं।
एएसआई को क्या मिला था:
29 मुसलमानों सहित 131 मजदूरों की टीम द्वारा खुदाई के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर एएसआई ने रिपोर्ट में विवादित स्थल पर मस्जिद से पहले 10वीं सदी का एक ढांचा होने के प्रमाण मिलने की बात कही है, जो हिंदू मंदिर की तरह था।
एएसआई ने अगस्त 2003 में 574 पेज की रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को सौंपी थी। पुरा अवशेषों में कमल, कौस्तुभ आभूषण जैसे हिंदू प्रतीक चिह्न् पाए गए हैं। यहां मिलर्ी ईटें बाबर के काल के पहले की पाई गई हैं। कुछ पुरावशेष जमीन से 20 फीट नीचे पाए गए हैं। एएसआई का मानना है कि 20 फीट से नीचे पाई गई सामग्री 1500 साल पुरानी होनी चाहिए। विवादित स्थल पर मूल सतह 30 फीट तक नहीं मिली है, जिससे अनुमान लगाया गया है कि उस स्थान पर 2500 साल पूर्व तक कोई न कोई ढांचा रहा है।
दैनिक भास्कर से साभार
शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010
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