शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010

नतीजे तक पहुंचने में एएसआई की रिपोर्ट बनी फैसले का आधार

अयोध्या में विवादित स्थल की जगह पर मस्जिद के अस्तित्व में आने से काफी पहले मंदिर होने के नतीजे तक पहुंचने में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के निष्कर्र्षो पर भरोसा जताया है। रिपोर्ट में संबंधित स्थल पर ढाई हजार साल पहले से कोई न कोई ढांचा मौजूद रहने के संकेतों की बात कही गई है।

बोर्ड ने किया था रिपोर्ट का विरोध :
कोर्ट के आदेश पर तैयार एएसआई की रिपोर्ट का सुनवाई के दौरान परीक्षण किया गया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने इसे पक्षपातपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एएसआई ने तथ्यों की गलत व्याख्या की है। बोर्ड के पास इसके खिलाफ अकाट्य ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य हैं।

एएसआई को क्या मिला था:
29 मुसलमानों सहित 131 मजदूरों की टीम द्वारा खुदाई के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर एएसआई ने रिपोर्ट में विवादित स्थल पर मस्जिद से पहले 10वीं सदी का एक ढांचा होने के प्रमाण मिलने की बात कही है, जो हिंदू मंदिर की तरह था।

एएसआई ने अगस्त 2003 में 574 पेज की रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को सौंपी थी। पुरा अवशेषों में कमल, कौस्तुभ आभूषण जैसे हिंदू प्रतीक चिह्न् पाए गए हैं। यहां मिलर्ी ईटें बाबर के काल के पहले की पाई गई हैं। कुछ पुरावशेष जमीन से 20 फीट नीचे पाए गए हैं। एएसआई का मानना है कि 20 फीट से नीचे पाई गई सामग्री 1500 साल पुरानी होनी चाहिए। विवादित स्थल पर मूल सतह 30 फीट तक नहीं मिली है, जिससे अनुमान लगाया गया है कि उस स्थान पर 2500 साल पूर्व तक कोई न कोई ढांचा रहा है।
दैनिक भास्कर से साभार

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

आ तू मना मेरी दिवाली, तेरी ईद मै मनाऊ

इटली के दौरे पर गए लीबिया के नेता मोहम्मद गद्दाफी ने यूरोप को इस्लाम कबूल करने की सलाह दी है। बंगला देश की एक मंत्री का बयान आया हिन्दू शाम को रोजा खुलने से पहले मना ले जन्म अष्टमी... कोई बताये क्या है ये????? सही धर्म को मानने वाला वह है जो अपने धर्म का पालन करे ओर दूसरे धर्म के अनुयाइयो का सम्मान करे,कुछ लोग इस्लाम की व्याख्या ऐसे करते है जैसे संसार मे केवल यही धर्म सही है और बाकी को अपने धर्म का त्याग कर मुसलमान बन जाना चाहिए.... ऐसी सोच पर रोक लगनी चाहिए तुम अपने धर्म के अनुसार इबादत करो  इसाई,हिंदू, यहूदी, बोध को अपने  धर्म मे बताए मार्ग पर चलने दो,सब एक दूसरे के धर्म का सम्मान करे, आख़िर ईश्वर तो एक ही है.आ तू मना दिवाली, तेरी ईद मै मनाऊ... लेकिन कुछ स्वार्थी लोग इस्लाम जैसे पवित्र ग्रंथ को बदनाम करने मे लगे है दुनिया मे अशांति का कारण ये ही लोग है

शनिवार, 10 जुलाई 2010

अब पश्चिम के पोल बाबा फुटबाल वर्ल्ड कप के नए सरताज

भारत को साधू और सपेरो का देश कहने वाले पश्चिम के लोग आजकल एक पोल बाबा की भविष्य वाणी के जाल में फंसे हुए है और उसकी बात को सच मानकर चल रहे है,अब पश्चिम के पोल बाबा फुटबाल वर्ल्ड कप के नए सरताज बने हुए है, पोल बाबा भी और कोई नहीं मात्र एक समुंदरी जीव???? जब खुद को एशिया के देशो से एडवांस बताने वाले ये लोग ऐसा कर रहे है तो फिर क्यों भारत को पिछड़ा बताकर खुश होते है जबकि भारत के युवाओ ने नासा में आपने आप को सिद्ध किया हुआ है, हम विश्व गुरु थे है और रहेंगे दुनिया को ज्ञान देने वाले भारत की ज्योतिष विद्या एक गिनती के आधार पर सच निकलती है. जिसे पश्चिम के देश नकारते है, सच तो ये  है कि आधुनिकता का लबादा पहने ये लोग सच में बड़े रूडी वादी ओर मानसिक रूप से पिछडे लोग है, फिर भी हम पश्चिम की ओर क्यों देखते है,जबकि  सूरज तो पूरब से निकलता है....

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

सानिया मिर्ज़ा को छोड़ो अब है साइना नेहवाल की बारी

साइना नेहवाल आज एक ऐसा नाम है जिसे बच्चा बच्चा जानने लगा है अब हमें किसी सानिया मिर्ज़ा की जरुरत नहीं है विशाल भारत देश की बेटिया कोई भी मुकाम हासिल कर सकती है. सानिया मिर्ज़ा के कारण मीडिया उसकी सफलताओ को हलके में लेता रहा आज सारा मीडिया साइना नेहवाल को कवर कर रहा है, यह खुशी की बात है. साइना नेहवाल के चमत्कारिक प्रदर्शन से पूरा देश गदगद है। इस हरियाणा की जाटनी और हैदराबादी बाला ने उस खेल में देश का मान बढ़ाया है जिसमें आजतक चीनी, जापानी वर्चस्व माना जाता था। दमखम के इस खेल में भारत की दूर-दूर तक कोई पहचान नहीं थी। प्रकाश पादुकोण, पुलेला गोपीचंद के आल इंग्लैंड टूर्नामेंट की सफलताओं को छोड़ दें तो भारत को कभी इस खेल में महाशक्ति नहीं माना गया। कई लोगों का तो यहां तक मानना था कि भारतीय महिलाएं तो महज खानापूरी के लिए इन खेलों में भाग लेती हैं। साइना ने पिछले सात साल की अपनी उपलब्धियों से जता दिया है कि वे कोई वक्ती बुलबुला नहीं हैं, उनके खेल में निरंतरता है। इस समय तो उनका खेल अपने शीर्ष पर है। साइना ने जापान की सयाका सातो को हराकर इंडोनेशियन ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का अपना खिताब बरकरार रखा। इस जीत के साथ लगातार तीन हफ्तों में खिताब जीतने की हैट्रिक बना दी है। उन्होंने इस टूर्नामेंट से पहले सिंगापुर में सिंगापुर ओपन और चेन्नई में इंडियन ओपन के खिताब जीते थे। साइना की यह तीसरी सुपर सीरीज सफलता है। गत वर्ष उन्होंने इंडोनेशियन ओपन के रूप में पहली बार सुपर सीरीज खिताब जीता था।हालाँकि उन्हें सानिया की तरह अपने खेल को निखारने के लिए ज्यादा स्पोंसर नहीं मिले हैं। लेकिन उनकी सफलताएं ज्यादा बड़ी हैं। अभी तक तो वे ग्लैमर से दूर रहकर केवल खेल पर ध्यान लगाए हैं। धीरे-धीरे उनकी रैंकिंग बढ़ती जा रही है। वे फिलहाल विश्व की तीन नंबर की महिला शटलर हैं। उनके आगे चीन, ताइवान की दो महिलाएं हैं। उनका दावा है कि जल्दी ही वे नंबर वन बन जाएंगी। जिस तरह बेहद कष्टों में उन्होंने इस खेल के लिए अपने सबकुछ झोंका है, उनका यह सपना भी पूरा हो सकता है। पूरा देश साइना नेहवाल के साथ है, सानिया मिर्ज़ा को बता दो की तुम जाओ पाकिस्तान हमारे पास खेल प्रतिभाओ की कमी नहीं, आज बेडमिन्टन में तो कल टेनिस में भी ........

शुक्रवार, 11 जून 2010

काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती ये इटली की नहीं हिन्दुस्तान की कहावत है

सोनिया गाँधी के नेतृत्व में चल रही दिल्ली सरकार आखिर क्यों विदेसियो पर बार बार मेहरबान होती है? पहले बोफोर्स टॉप सौदे में दलाली खाने वाले इटली के क्वात्रोची को बचाने में सारे कांग्रेसी जुटे रहे, अब भोपाल गैस कांड के आरोपी एंडरशन को इस तरह बचाया जा रहा है मानो वह भारत सरकार का मेहमान हो, दलितों व मजदूरो का हितेषी बनने का ड्रामा करने वाले राहुल गाँधी ये बताये की हजारो मजदूर परिवारों को मौत की नींद सुलाने वाले एंडरशन को उनकी सरकार ने देश से जाने क्यों दिया, क्वात्रोची की तरह ही एंडरशन को भी बचाने की तेयारी क्यों हो रही है, यह सरकार राहुल सोनिया के इशारे पर चल रही है, लेकिन विवादित मामले आते ही ये दोनों दुबक जाते है, ताकि जो छवि ख़राब होनी हो वो बेचारे सरदार मनमोहन सिंह की हो और युवराज व महारानी की छवि चुनावो में जनता को दिखने के लिए बची रहे, बाद में मनमोहन सिंह का भी वो ही हाल होना है जो इस गाँधी परिवार और उसके चमचो ने पी वी नर्सिगराव का किया था,सारे दोष सरदार जी के सर पर डाल कर ये माँ बेटा फिर जनता का मानसिक शोषण करने मैदान में आ जायेगे, लेकिन काठ की हांड़ी बार बार  नहीं चढ़ती ये इटली की नहीं हिन्दुस्तान की कहावत है, एंडरशन को पकड़ कर लाओ क्वात्रोची पर फिर से मुकदमा चलाओ तभी देश की जनता तुम्हे माफ़ करने पर विचार करेगी

बुधवार, 26 मई 2010

मेरे मन में पीड़ा क्यों है जो मरता है मरने दो न

गाँधी गाल के राजा बैठे प्रजा को भुने आतंकी
मेरे मन में पीड़ा क्यों है जो मरता है मरने दो ना
अफजल और कसाब यहाँ पर खाते जेलों में बिरयानी
भारत के कितने बच्चो की आँखों में डाले जो पानी
मन मोहन जी आम भेजकर खुश करते है करने दो ना
मेरे मन में पीड़ा क्यों है जो मरता है मरने दो ना
कारगिल पर्वत को काटा नाखुनो से उनका क्या
नोबेल पुरस्कार को पाना बना हुआ है लक्ष्य यहाँ
बम्ब फोड़ो जनता को मारो वोट बैंक तो बढने दो ना
मेरे मन में पीड़ा क्यों है जो मरता है मरने दो न

शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

बस अब बहुत हो चुका सानिया प्रकरण, अब बंद होना चाहिए

गुजरात के एक हिन्दू परिवार ने सानिया से प्रभावित होकर अपनी बेटी का नाम सानिया रखा था, लेकिन अब क्या हुआ उसने नाम बदल कर संगीता रख दिया क्योकि उन्हें सानिया नाम से नफरत हो गई,  इसे आप क्या कहेंगे................  ......  बस अब बहुत हो चुका सानिया प्रकरण, अब बंद होना चाहिए, उसे पाकिस्तानी बन जाने मज़ा ले लेने दो, अब और उसके पीछे पागल मत बनो, मीडिया को अब उसकी खबरे बंद कर देनी चाहिए, सानिया ने  हिन्दुस्तान के लिए समर्पित मुस्लिमो को गहरा आघात दिया है, मुस्लिमो को पाक परस्त कहने वालो की बातो को बल मिला है, सवा अरब की आबादी में तीस करोड़ मुस्लिमो के देश में सानिया को दूल्हा नहीं मिला, शादी की दुश्मन देश के उस युवक से जिसने सानिया के ही शहर की युवती को धोखा दिया है, पता चलने पर भी सानिया बेशर्मो की तरह पत्रकारों के सामने हंसती नज़र आई, इस देश ने सानिया को सर पर बैठाया, यहाँ के मुस्लिमो ने खेल के सामने धर्म को नहीं आने दिया, पाकिस्तान में छोटी स्कर्ट में खेल कर दिखाना तब पता चलेगा, हिंदुस्तान की तरक्की से जलने वाले पाकिस्तानी सानिया को पाकर ऐसे खुश हो रहे है जैसे बंगला देश का बदला ले लिया हो, एक सानिया के जाने से इस विशाल देश का कुछ नहीं घटने वाला है यहाँ तो सचिन, इरफ़ान, जहीर, बिंद्रा, बिजेंदर जाने कितने महान खिलाडी है, जिनका डंका दुनिया में बजता है मै अपने  ब्लॉग पर क्यों दिलो से समाप्त हो चुकी महिला का जिक्र कर रहा हूँ बंद करो अब.....

मंगलवार, 23 मार्च 2010

ठीक किया शीला दीक्सित ने…. कांग्रेस का हाथ कब तक रहे गरीब के साथ

ठीक किया शीला दीक्सित ने ,इस देश की जनता के साथ ऐसा ही होना चाहिए ,अब चार साल तक सत्ता से तो कोई माई का लाल हिला नहीं सकता , चुनाव में नेताओ को नचाने वाली जनता की सरकारी सब्सिडी व अन्य सुविधाए अब क्यों न समाप्त की जाये,रास्ट्र कुल खेलो ने दिल्ली सरकार को कंगाल बना दिया है शीला जी मतलब परस्त वोटरों को पहचान गई है वैसे भी आगे इनका कोई भरोसा नहीं है, क्यों न कर्जे में दबने जा रही दिल्ली को बचा लिया जाये, सब्सिडी समाप्त करने का फ़ॉर्मूला कामयाब रहा तो इसे दुसरे राज्य भी अपनायेगे, सुविधाओ ने सरकारी खजानों को खाली कर दिया है जनता को पता नहीं है सब उसकी ही जेब से जाता है, देश को बचाना है तो आरक्षण समेत  सभी सहायताए बंद कर देनी चाहिए, केवल सभी वर्ग व धर्म के बालको की पूरी शिक्षा व सबके लिए इलाज मुफ्त हो, दिल्ली सरकार ने बीमार होती दिल्ली को कडवी गोली देकर ठीक करने का प्रयास किया है ,आपने बहुत दिन राज कर लिया शीला जी डरना मत, विकास की समझ रखने वाले फिर भी तुम्हारे साथ खड़े होंगे, इंदिरा जी ने भी कठोर फैसले लिए थे ,हिन्दुस्तान के वोटर की यादास्त बेहद कमजोर है भूल जायेगे की अब एलपीजी ४० रुपए महंगी मिलेगी, ४० रूपये किलो चीनी खाकर भी देश ने फिर से सरदार मनमोहन को प्रधान मंत्री बना दिया,आपको भी फिर से बना देंगे,बस ध्यान रखना जो पैसा आप जनता की जेब से निकाल रही है उसकी खेल के नाम पर बड़े लोगो में बन्दर बाँट होंगी उसे आप कैसे रोकेंगी.    

बुधवार, 10 मार्च 2010

आईपीएल के खिलाडी क्रिकेट के भगवान् नहीं हो सकते

आईपीएल कभी भी वो रोमांच नहीं ला सकता, जो एक देश की टीम अपने देश वासियो को दिला सकती है, क्रिकेट में कोई भी रोमांच नहीं है, रोमांच तो जब बनता है जब दो मुल्क भिड़ते है और दोनों देश की हर गली, नुक्कड़ पान की दूकान युद्ध का मैदान बन जाती है, आईपीएल होना अच्छा है, लेकिन इसकी कोई भी टीम किसी के लिए भी हार जीत पर जीवन मरण का कारण नहीं बन सकती इसकी किसी भी टीम की हार जीत में भारी निराशा और बेपनाह खुशिया नहीं हो सकती, न ही जीतने की ख़ुशी और हार की हताशा में सीमा पर गोली बारी हो सकती, आईपीएल के खिलाडी अच्छे खिलाडी तो हो सकते है, क्रिकेट के भगवान् नहीं हो सकते, यही कारण है की क्रिकेट के लाखो शोकीन तो आईपीएल से जुड़ते है , लेकिन करोडो दीवानों को इसमें कुछ खास नज़र नहीं आता.

मंगलवार, 9 मार्च 2010

दुनिया पुरुषो की है, इसे पुरुष ही चलाये तो बेहतर है

महिला आरक्षण विधेयक का सर्वाधिक नुक्सान मुस्लिम समाज को होगा क्योकि उनकी महिलाये राजनीती में कम ही निकलती है लगता है बीजेपी इसी कारण कांग्रेस के साथ वोट करने से परहेज नहीं कर रही है, कांग्रेस भी बीजेपी का काम ही करती नज़र आ रही है, लेकिन चाणक्य से लेकर आज तक एक बात सत्य है कि महिलाओ के लिए जमाना कभी नहीं बदल सकता दुनिया पुरुषो की है, इसे पुरुष ही चलाये तो बेहतर है, महिलाओ की शरीर रचना ऐसी नहीं है की वो ज़माने के जोखिमो को झेल सके और दुनिया में जोखिम अब पहले से बढे है ऐसे में पुरुषो का काम पुरुष और महिलाओ का काम महिलाये ही करे तो बेहतर है, एक रिपोर्ट के अनुसार देखा जा रहा है की सार्वजनिक जीवन में रहने वाली महिलाओ के कारण उनके बच्चे सफ़र कर रहे है, वे ममता, शिक्षा और मार्ग दर्शन के अभाव व दिशा हीनता का शिकार बने है, नारी परिवार को बनाती है उसे राज काज के झंझट में मत डालो 

सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

कांग्रेस का हाथ गरीब के साथ??

देश की गरीब जनता आटा, दाल,चीनी को जानती है पाकिस्तान जैसी टेडी पूंछ से वार्ता का नतीजा पहले से ही देश की जनता को पता है,इस सरकार से पहले 18 रूपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी  44 रूपये बिक रही है और सोनिया के प्रधान मंत्री अर्थ शास्त्री कहे जाने वाले सरदार मनमोहन सिंह को जबरन ये देश झेल रहा है,उधर .सोनिया, राहुल,प्रियंका राज परिवार बनकर सरकारी ऐशोआराम का मज़ा लूट रहे है, कहाँ गया कांग्रेस का हाथ गरीब के साथ????? आजादी से लेकर आज तक कांग्रेस का विकल्प तैयार न हो पाने से देश की ऐसी दुर्गति हो रही है, इस देश का भाग्य लार्ड माउन्टबेटन की पत्नी की कलम से लिखवाने वाली कांग्रेस आज तक देश को पतन की और ले जाने में जुटी है, देश का गरीब आदमी पिस रहा है और कांग्रेस के चमचा संस्कृति के लोग चाहते है की संसद में महंगाई पर बात न हो तुम मरो और हम उफ़ भी न करे.......  

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

मैंने अमर सिंह के ब्लॉग पर लिखा

अमर सिंह जी 
मुझे राजनीती की समझ कम है लेकिन फिर भी एक बात समझ में नहीं आती कल्याण सिंह BJP छोड़ते ही उसकी नीतियों को गाली देने लगते है राम मंदिर को भूल बताते है, भेरो सिंह टिकट न मिलने पर उस पार्टी को कोसने लगते है जिसने उन्हें उप राष्ट्रपति तक सम्मान दिया अब आप भी दो दिन में मुलायम सिंह और उनके हिंदी प्रेम व प्रदेश विभाजन विरोध के खिलाफ बोलने लगे, क्या ये केवल विरोध करने वाली नीति नहीं है जब आप समाजवादी में थे तो मुलायम सिंह को समझाया क्यों नहीं? प्रदेश का बंटवारा समय की मांग है यह आपको समाजवादी पार्टी में रहते ही समझ में आना चाहिए था, मुझे नहीं लगता मुलायम सिंह ने आपकी कोई बात टाली हो, उनके भाई और अन्य नेताओ से आपके मतभेद हो सकते है, अचानक विचारधारा नहीं बदल सकती यह तो बच्चो की जिद और लड़ाई जैसा है,  

4 साल की उम्र वाला प्रस्ताव कानून बना कर पुरे देश में लागु कराओ

कपिल सिब्बल शगुफे भी छोड़ रहे है और अपने को लाचार भी दिखा रहे है देश ने तुम्हे नीती निर्धारण की शक्ति दी है केवल लाल बत्ती गनर भत्ते लेने के लिए नहीं बच्चो के स्कूल जाने का  4 साल की उम्र वाला प्रस्ताव कानून बना कर पुरे देश में लागु कराओ केवल दिल्ली का क्या मतलब है कांग्रेस के मंत्री शोर ज्यादा मचाते है करते कुछ नहीं, डरते रहते है, कही हाई कमान नाराज न हो जाये कांग्रेस के विकल्प के अभाव में मंत्री बने बैठे हो सिब्बल जी कुछ कर दिखाओ दुनिया याद करेगी. 

शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

अच्छा है सरकार BAMS BUMS डोक्टर्स को ६ माह का कोर्स कराये


गांवों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के मकसद से ग्रामीण डॉक्टर तैयार करने के लिए विशेष मेडिकल डिग्री के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। साढ़े तीन साल की इस डिग्री कोर्स के पहले बैच में 6000 छात्र दाखिला लेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की सलाह को मानते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने योजना को मंजूरी दे दी है। एमबीबीएस के साढ़े चार साल के कोर्स को एक साल घटा कर साढ़े तीन साल का बैचलर ऑफ रूरल हेल्थ केयर (बीआरएचसी) का यह कोर्स बनाया गया है। इसमें सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के छात्र ही दाखिला ले सकेंगे और उन्हें इसी क्षेत्र में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस दिया जाएगा। वे शहरी क्षेत्रों में प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। मेरी राय है की-
अगर ग्रामीण सेवा के लिए इन डॉक्टर को भी दोयम दर्जे का नहीं बनाना है तो अच्छा है सरकार BAMS और  BUMS डोक्टर्स को एक ६ माह का कोर्स कराकर उनकी सीमाए बढ़ा दे, उनसे गाव में ही कार्य करने का लिखित शपथ पत्र ले, वे अधिक कारगर होंगे,वर्ना इस नई डीग्री वालो को भी जीवन भर IMA वालो के कडवे शब्द झेलने होंगे,अभी भी ग्रामीणों को सबसे अधिक सेवा AYUSH के डॉक्टर ही दे रहे है    

शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

पाकिस्तान अपने को बदले वर्ना दुनिया उसे बदल देगी

दुनिया जानती हैं पाकिस्तान के हालात इसे कोई देश नहीं कह सकता वहां केवल आतंकवादी शिविर, सडको पर धरम के नाम पर पेट पर बम्ब बांधे नासमझ इंसान और आकाश में ड्रोन घूम रहे हैं, भारत सरकार की सियाशी मज़बूरी हो सकती है पाक खिलाडियो के सम्मान की रक्षा करना;आइपीअल वाले क्यों करे उन्हें तो आपने मैच करने के लिए शांति चाहिए, अफरीदी भारत सरकार को दबाव में लेना कहते थे एक बड़े अवाम को खुश करने के लिए खेल मंत्री बयान भी आये जिनकी जरुरत नहीं थी, दुनिया को अब अपना नजरिया बदलना होगा,पाकिस्तान ने खुद को न बदला तो दुनिया उसे बदल देगी इसकी शुरुवात IPL से हो चुकी है



गुरुवार, 28 जनवरी 2010

लाल चौक पर क्यों नहीं फेहरा तिरंगा सरकार दे जवाब

बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने जब लाल चौक पर तिरंगा फेहराया था तब कांग्रेस नेता उसे ड्रामा बता रहे थे I आज कश्मीर में कांग्रेस की सरकार है फिर भी लाल चौक पर तिरंगा ना फेहराया जाना सैनिको का मनोबल गिराने जैसा है I यह सरकार अरबो रूपए के बैंक घोटाले में शामिल चटवाल को पदम् विभूषण दे रही है I विज्ञापनों पर पाकिस्तानी जनरलों के फोटो लगाये जा रहे है I लाल चौक पर तिरंगा ना फेहराना दुर्भाग्य पूर्ण घटना है I इसकी जितनी निंदा हो कम है I

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

कमर तोड़ महंगाई में ये कैसा गणतंत्र

देश में कमर तोड़ महंगाई  हो और हम राजपथ पर करोडो रूपये खर्च कर गणतंत्र दिवस मन रहे है क्या राष्ट्र ध्वज को फहराकर जय हिंद के नारे के साथ सादे समारोह से गणतंत्र दिवस नहीं मन सकता इस वर्ष इस धन का उपयोग अनाज और चीनी की व्यवस्था करने में होता तो बेहतर था राजपथ का महंगा प्रदर्शन अब बंद हो जाना चाहिए 



गुरुवार, 21 जनवरी 2010

हिम्मत है तो हिंदी फिल्मे बनाने पर बैन करे महाराष्ट्र सरकार

महारास्ट्र की कांग्रेस सरकार भी देश को तोड़ने की कसम खाकर बैठे राज ठाकरे के पद चिन्हों पर चलने लगी है,अब केवल मराठी  जानने वालो को ही देगी टेक्सी चलने की अनुमति, यह सब वर्षो से अपना देश समझ कर वहां रह रहे उत्तर भारतियो के खिलाफ किया जा रहा है ,अगर महारास्ट्र सरकार में हिम्मत है तो मुंबई में हिंदी फिल्मे बनाने पर रोक लगाए, केवल मराठी फिल्म बनने दे, फिर देखे कौन मुंबई जैसी जल्दी ही समुन्द्र में डूब जाने वाली बेकार जगह कौन जाना चाहेगा, यूपी के अमिताभ और दिल्ली के शाहरुख़ खान को वापस भेजे, पजाब के मनमोहन सिंह को महारास्ट्र में न घुसने दे जब तक वो मराठी न सीख ले, हिंदी है हम वतन है हिंदोस्ता हमारा पंक्ति गीत से निकलवा दे सोनिया गाँधी, या फिर अपनी इस देश विरोधी महारास्ट्र सरकार व राज ठाकरे जैसे लोगो पर नियंत्रण करे वर्ना देश की अखंडता के लिए दिया गया इंदिरा राजीव का बलिदान बेकार जायेगा

बुधवार, 20 जनवरी 2010

राम तेरी गंगा किसने की मैली

धर्म के नाम पर पाखंडो ने देश की हालत ख़राब कर दी है ,सडको पर जाम,गंदगी,अरबो रूपये का नुक्सान, कुम्भ हो या कावड मेला गणपति हो या रथ यात्रा, सबने देश को कई १०० वर्ष पीछे धकेला है ,भगवान माता पिता के रूप में घर में विराजमान है, उनकी सेवा छोड़ पाखंडी लोग मेलो की भगदड़ में मरने के लिए भटक रहे है, भगवान परिवार के जीविकोपार्जन के लिए किये जाने वाले कर्म में है, और मुर्ख व कर्म से भागने वाला इंसान उसे पाने को देश के करमशाली किसानो की फसलो को जीवन देने वाली नदियो को प्रदुषित कर रहा है, हरिद्वार में पहुचने वाले करोडो भटके हुए लोगो का मल मूत्र गंगा में बहता है ,इस आत्याचार से माँ गंगा को बचाओ, तुम अपने कर्म पर ध्यान दो गंगा को गंगा रह जाने दो..........