मंगलवार, 23 मार्च 2010

ठीक किया शीला दीक्सित ने…. कांग्रेस का हाथ कब तक रहे गरीब के साथ

ठीक किया शीला दीक्सित ने ,इस देश की जनता के साथ ऐसा ही होना चाहिए ,अब चार साल तक सत्ता से तो कोई माई का लाल हिला नहीं सकता , चुनाव में नेताओ को नचाने वाली जनता की सरकारी सब्सिडी व अन्य सुविधाए अब क्यों न समाप्त की जाये,रास्ट्र कुल खेलो ने दिल्ली सरकार को कंगाल बना दिया है शीला जी मतलब परस्त वोटरों को पहचान गई है वैसे भी आगे इनका कोई भरोसा नहीं है, क्यों न कर्जे में दबने जा रही दिल्ली को बचा लिया जाये, सब्सिडी समाप्त करने का फ़ॉर्मूला कामयाब रहा तो इसे दुसरे राज्य भी अपनायेगे, सुविधाओ ने सरकारी खजानों को खाली कर दिया है जनता को पता नहीं है सब उसकी ही जेब से जाता है, देश को बचाना है तो आरक्षण समेत  सभी सहायताए बंद कर देनी चाहिए, केवल सभी वर्ग व धर्म के बालको की पूरी शिक्षा व सबके लिए इलाज मुफ्त हो, दिल्ली सरकार ने बीमार होती दिल्ली को कडवी गोली देकर ठीक करने का प्रयास किया है ,आपने बहुत दिन राज कर लिया शीला जी डरना मत, विकास की समझ रखने वाले फिर भी तुम्हारे साथ खड़े होंगे, इंदिरा जी ने भी कठोर फैसले लिए थे ,हिन्दुस्तान के वोटर की यादास्त बेहद कमजोर है भूल जायेगे की अब एलपीजी ४० रुपए महंगी मिलेगी, ४० रूपये किलो चीनी खाकर भी देश ने फिर से सरदार मनमोहन को प्रधान मंत्री बना दिया,आपको भी फिर से बना देंगे,बस ध्यान रखना जो पैसा आप जनता की जेब से निकाल रही है उसकी खेल के नाम पर बड़े लोगो में बन्दर बाँट होंगी उसे आप कैसे रोकेंगी.    

बुधवार, 10 मार्च 2010

आईपीएल के खिलाडी क्रिकेट के भगवान् नहीं हो सकते

आईपीएल कभी भी वो रोमांच नहीं ला सकता, जो एक देश की टीम अपने देश वासियो को दिला सकती है, क्रिकेट में कोई भी रोमांच नहीं है, रोमांच तो जब बनता है जब दो मुल्क भिड़ते है और दोनों देश की हर गली, नुक्कड़ पान की दूकान युद्ध का मैदान बन जाती है, आईपीएल होना अच्छा है, लेकिन इसकी कोई भी टीम किसी के लिए भी हार जीत पर जीवन मरण का कारण नहीं बन सकती इसकी किसी भी टीम की हार जीत में भारी निराशा और बेपनाह खुशिया नहीं हो सकती, न ही जीतने की ख़ुशी और हार की हताशा में सीमा पर गोली बारी हो सकती, आईपीएल के खिलाडी अच्छे खिलाडी तो हो सकते है, क्रिकेट के भगवान् नहीं हो सकते, यही कारण है की क्रिकेट के लाखो शोकीन तो आईपीएल से जुड़ते है , लेकिन करोडो दीवानों को इसमें कुछ खास नज़र नहीं आता.

मंगलवार, 9 मार्च 2010

दुनिया पुरुषो की है, इसे पुरुष ही चलाये तो बेहतर है

महिला आरक्षण विधेयक का सर्वाधिक नुक्सान मुस्लिम समाज को होगा क्योकि उनकी महिलाये राजनीती में कम ही निकलती है लगता है बीजेपी इसी कारण कांग्रेस के साथ वोट करने से परहेज नहीं कर रही है, कांग्रेस भी बीजेपी का काम ही करती नज़र आ रही है, लेकिन चाणक्य से लेकर आज तक एक बात सत्य है कि महिलाओ के लिए जमाना कभी नहीं बदल सकता दुनिया पुरुषो की है, इसे पुरुष ही चलाये तो बेहतर है, महिलाओ की शरीर रचना ऐसी नहीं है की वो ज़माने के जोखिमो को झेल सके और दुनिया में जोखिम अब पहले से बढे है ऐसे में पुरुषो का काम पुरुष और महिलाओ का काम महिलाये ही करे तो बेहतर है, एक रिपोर्ट के अनुसार देखा जा रहा है की सार्वजनिक जीवन में रहने वाली महिलाओ के कारण उनके बच्चे सफ़र कर रहे है, वे ममता, शिक्षा और मार्ग दर्शन के अभाव व दिशा हीनता का शिकार बने है, नारी परिवार को बनाती है उसे राज काज के झंझट में मत डालो