शनिवार, 10 अक्टूबर 2009

आयुर्वेद की जय होनी ही है


 आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय औषधीय पौध मिशन के तहत शुरू की जाने वाली औषधीय पौधों की खेती की योजना परवान चढ़ने लगी है। मेरठ, बागपत तथा कई अन्य जिलों के उद्यान अधिकारियों ने विभाग को किसानों की दिलचस्पी से अवगत कराया है। प्रदेश के 41 जिलों कानपुर देहात, इटावा, कन्नौज, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फर नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, महामायानगर, एटा, कांशीराम नगर, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, बिजनौर, मुरादाबाद, मथुरा, आगरा, झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, इलाहाबाद, कौशाम्बी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, वाराणसी, बलरामपुर, श्रावस्ती, फैजाबाद, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और सीतापुर में योजना संचालित की जा रही है।
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा जारी सूची के मुताबिक सर्वाधिक अनुदान स्टीविया की खेती पर 62,500 रुपये दिया जायेगा। आंवला की खेती पर 13,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, अश्वगंधा पांच हजार प्रति हेक्टेयर, ब्राम्ही 8,000 रुपये, कालमेघ 5,000 रुपये, कौंच चार हजार, सतावर 12,500 रुपये, घृतकुमारी 8,500 रुपये और तुलसी की खेती करने पर छह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अनुदान दिया जायेगा। अंग्रजी दवा के परयोग से परेशान मरीज आयुर्वेद अपना रहे है आयुर्वेद की जय होनी ही है.

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